जिन्हें गुस्सा आता है

जिस व्यक्ति को बहुत ज्यादा गुस्सा आता है वो इंसान अपने जीवन में कभी भी किसी से कोई अच्छा सम्बन्ध नहीं बना सकते इसके पीछे भी एक कारण है और कारण यह है कि उन्हें अपने गुस्से पर काबू पाना आता ही नहीं है या यूं कहें कि वे लोग अपने गुस्से पर काबू कर ही नहीं पाते है । इससे क्या होता है कि उनका किसी के भी साथ ज्यादा समय तक नहीं रहता है । मजबूरन उन्हें सबसे दूर और अकेले रहना पड़ता है।
   

  एक कहानी मैं आपको बताता हूं। और वो कहानी है एक लड़के की --

                    एक लड़का था ।  उसका मोनू नाम था। मोनू को बहुत ज्यादा गुस्सा आता था।  बात -बात पे गुस्सा आता था। -कई बार तो  वह चीजों को उठा कर फेंक पटककर तोड़ दे ता था ।इतना गुस्सा आता था कि वह कभी कभी गुमशुदा हो जाता था ,जब उसे गुस्सा आता था तो वह ये नहीं देख लोता था कि उसके सामने जो  खड़ा है उससे उसका क्या रिश्ता है , उसे उस व्यक्ति से कैसे बात करना चाहिए । ये सारी बातें वो भूल जाता था जब उसे गुस्सा आता था। वो गुस्से में हर दिन किसी न किसी को उल्टी सीधी बातें करता था , इससे उसके सारे दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी, यहां तक कि उसके अपने भाई बहन भी उससे दूर रहने लगे।
उसके मां-बाप तथा परिवार के सभी सदस्यों के द्वारा अलग-अलग तरीकों से समझाया लेकिन वो नहीं सुधरा 




फिर एक दिन उसकी मां ने उसके ट्यूशन टीचर से  भी बात की, क्योंकि ट्यूशन टीचर ही एक ऐसा व्यक्ति था जिसकी बात ध्यानपूर्वक सुनता था और उसके द्वारा कहे गए कार्य को करता था। उस टीचर ने उसकी मां की सारी बातें सुनी और कहा कि आप चिंता न करें, मैं आपसे वादा करता हूं कि आने वाले कुछ ही दिनों में उसका गुस्सा खत्म हो जायेगा। उसकी मां को समझ नहीं आया कि वह क्या कहना चाहता है। फिर भी उन्होंने कहा कि कोशिश करने में क्या जाता है। फिर वो रोज कि तरह वो टीचर उसे पढ़ाने आया और जब वह क्लास शुरू करने वाला था। तब उसने कहा कि आज हम पढ़ाई नहीं करेंगे आज हम एक गेम खेलेंगे। यह सुनकर के मोनू बहुत खुश हुआ, फिर टीचर उसके साथ उसके घर के पीछे एक दीवार के पास जाकर खड़े हो गए और उस टीचर ने उस लड़के से कहा कि जब भी तुम्हें गुस्सा आए,  तो तुम्हें एक कील लेनी है , और आकर के इस दीवाल में गाड़ देनी है। थोड़ी सी जितनी हो सके फिर उस लड़के ने टीचर से पूछा कि इससे क्या होगा तो टीचर ने कहा कि जब यह गेम खत्म हो जाएगा तो एंड में तुम्हें एक प्राइस मिलेगा फिर मोनू ने वैसा ही किया जैसा उसके टीचर ने कहा था। फिर उसके बाद जब भी उसे गुस्सा आता था। इसलिए उसे जब भी गुस्सा आता था तो वह एक कील लेकर जाता और दीवाल में गाड़ देता था। और जैसा कि उस लड़के को बहुत ज्यादा गुस्सा आता था तो पहले ही दिन उसने 10 से ज्यादा किले दीवाल में गाड़ दी लेकिन उनकी लोको गाड़ने के लिए उसे बार-बार पीछे जाना पड़ता था और उस कील को गाना पढ़ता था फिर उसके दिमाग में आया कि जितना मेहनत वह एक कील को गाड़ने में करता है उससे कहीं कम मेहनत में वह अपने गुस्से को काबू कर सकता है। यही बात सोच कर अगले दिन आठ कीले गड़़ी उसके बाद अगले दिन छःकीले गड़ी ,उसके बाद अगले दिन फिर चार, फिर तीन,फिर दो फिर एक । उसके बाद एक दिन ऐसा आया जब उसे गुस्सा ही नहीं आया, तो वह बहुत खुश हुआ और खुशी- खुुुशी अपने टीचर के पास जाकर के बोला कि सर आज मुझे गुस्सा नहींं आया। और आज दीवाल पर एक भी कील नहीं गड़ी है। मेरे को एक बार भी गुस्सा नहीं आया ऐसा उसने अपने टीचर से कहा सर नेे थोड़ी उसेे शाबाशी दी। और टीचर उसके साथ उसके घर के पीछे के दीवार के सामने जाकर खड़ा हो गया। मोनू केेेेेे टीचर ने कहा कि मोनू अभी  गेेेेम खत्म नहीं हुआ है। 



अब तुम्हें क्या करना है कि जिस दिन भी तुम्हें गुस्सा बिल्कुल भु नहीं आए। उस दिन के लास्ट में तुम इस दीवाल से एक कील निकाल दोगे, तो उस लड़के ने वैसा ही किया लेकिन किले बहुत ज्यादा थी। उन्हें निकालने में 1 महीने से ज्यादा समय भी लग गया, उनके कीलियों को बाहर निकालने में। लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब सारे किले बाहर निकल गई।फिर वह लड़का बहुत खुश हुआ और अपने टीचर के पास जा करके बोला कि सर आज दीवाल की सारी कीले निकल गई। तो टीचर लड़के के साथ में जाकर उस दीवाल के सामने खड़े हो गए। उसने देखा कि दीवाल में एक भी कील नहीं लगी है। उसने उसे उसकी फेवरेट चॉकलेट दी और बोला यह तुम्हारा गेम का प्राइस है तुम जीत चुके हो। फिर वह बच्चा बहुत खुश हुआ उसके बाद उसके टीचर ने फिर उससे पूछा कि बेटा क्या तुम्हें इस दीवाल में कुछ नजर आ रहा है। लड़के ने कहा नहीं सर मैंने इसमें से सारी कीले निकाल ली है। 


 फिर टीचर ने कहा कि बेटा एक बार ध्यान से देखो शायद तुम्हें कुछ नजर आए, तो लड़के ने दोबारा ध्यान से मन लगाकर के देखा और कहा कि जो कीले मैंने गाड़ी थी उसके कुछ निशान मुझे नजर आ रहे हैं। 




जब लड़के ने इस चीज को देख लिया तब उसकी टीचर ने उससे कहा, जैसा तुमने यह दीवाल में कील गाड़ी है और तुम अब खेल को निकाल सकते हो लेकिन उसके निशान को नहीं मिटा सकते हो। ठीक उसी प्रकार से होता है जब तुम गुस्सा करते हो। जब आप गुस्सा करते हैं अपने मां-बाप या किसी और पर तो उनके दिल पर चोट लगती है उनको दर्द होता है। वहां पर एक निशान रह जाता है उस निशान को तुम चाह करके भी नहीं मिटा सकते। फिर चाहे तुम उनसे कितनी भी माफी मांग लो यह सुनकर के उस लड़के को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह रोने लगा और भागते हुए अपनी मां के पास गया और उनसे लिपट कर रोने लगा और अपने मां से बोला कि मैं आज के बाद मैं कभी भी आपसे गुस्सा नहीं करूंगा मुझे समझ आ गया है मैंने क्या गलती की है और उस दिन के बाद उस लड़के ने कभी गुस्सा नहीं किया।



तो दोस्तों आप भी अपनी लाइफ में एनी के अपने जीवन में गुस्से को आने ही ना दें यानी कि गुस्से पर बहुत ही ज्यादा कंट्रोल करें क्योंकि जब आप गुस्से पर कंट्रोल कर लेते हैं तो आप बहुत सुखी जीवन जीते हैं गुस्सा करने से हमारे शरीर का खून ही चलता है तो गुस्सा करने से कुछ नहीं होता केवल माइंड का डिस्टर्ब होता है।






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