महान फुटबॉल खिलाड़ी ( रोनाल्डो) the best football player Ronaldo
कहते हैं कि एक ओवरनाइट सफलता के पीछे सालों की मेहनत होती है।एक पागलपन होता है उस सपने के लिए और बचपन से कुछ ऐसा ही पागलपन था एक माली के बेटे में फुटबॉल को लेकर और उसके पागलपन ने इस बंदे को क्रिस्टियानो रोनाल्डो बना दिया जो आज हर घर फुटबॉल लवर के दिल की धड़कन है जी हां दोस्तों में बात कर रहा हूं फुटबॉल के पहचान क्रिस्टीयानो रोनाल्डो की आज से सब जानते हैं कि यह बंदा अरबों के बंगलों में रहता है करोड़ों की गाड़ियों में घूमता है पर इस कामयाबी के पीछे का स्ट्रगल नंबर वन बने रहने के लिए जो मेहनत है उससे कुछ बहुत ज्यादा है पर आज इस लेख में बंदी की कुछ इससे पढ़ने के बाद देखने के बाद आप भी बोलोगे कि कामयाबी ऐसे शख्स से दूर नहीं रह सकती रोनाल्डो के कोच बताते हैं एक दिन उन्होंने ऑफिस की खिड़की से कुछ पेड़ों को हिलते हुए देखा उन्हें लगा कि कुछ मीडिया व ले जासूसी कर रहे हैं पर पूछताछ करने के बाद पता चला कि रोनाल्डो जंगली पेड़ों के बीच अकेले प्रैक्टिस कर रहे थे।ताकि अपने स्किल्स को और इंप्रूव कर सके मजबूती प्रदान कर सके जब ट्रेनिंग के बाद सारे टीममेट्स चले जाते थे तब भी यह बंदा अकेले ही प्रैक्टिस करता था जहां हमें 6:00 बजे ऑफिस छूटने के लिए होता था वहां हम 5:00 बजे तैयार होकर बैठ जाते हैं क्योंकि जो हम कर रहे हैं उसमें हमारा पैसा नहीं नहीं है हम बस किए जा रहे हैं बेड के साथ चल रहे हैं खोज के अनुसार 96% लोग अपने पैशन को फॉलो नहीं करते और यह 96% लोग उन 4 लोगों के लिए काम करते हैं जो 100 बार हारने के बाद भी अपने पैशन को कम नहीं होने देते दूसरे लोग अक्सर यही बहाने बताते हैं कि घर वाले सपोर्ट नहीं करते पैसा नहीं है स्किल्स नहीं है मन नहीं लगता यह सब बातें पर विजेता रास्ते खोज ही लेते हैं कुछ ऐसे ही मुश्किलें रोनाल्डो के जीवन में थी आई पर मुश्किलें इस बंदे का बाल भी बांका ना कर सके 12 साल की उम्र में इस बंदे को फुटबॉल खेलने को लेकर अपने घर वालों मां-बाप से दूर रहना पड़ा 15 साल की उम्र में डॉक्टरों ने इन्हें हार्ट की समस्या (problem of heart) के कारण फुटबॉल खेलने से मना कर दिया पर अब तक का यह खेल इस बंदे की जान बन चुका था पर इसके पास अब दो रास्ते थे पहला यह कि फुटबॉल खेलना छोड़ दे और दूसरा यह कि सर्जरी करा ले और बेशक इस शख्स ने दूसरा रास्ता चुना और इस शख्स अपनी मुश्किलों से उभरे नहीं थे कि इनके ऊपर दूसरा पहाड़ टूट पड़ा ज्यादा शराब पीने की वजह से इनके पिता की मौत हो गई इससे रोनाल्डो को बहुत बड़ा सदमा लगा पिता के बाद घर का खर्चा चलाने के लिए उनकी मां को दूसरे के घर में काम करना पड़ा इतनी मुसीबतों के बावजूद भी इस बंदे ने पैशन के लिए मेहनत करना नहीं छोड़ा यह होता है पागलपन मेहनत अपने पैशन के लिए अपने सपनों के लिए और ऐसे ही पागलपन लोग आगे चलकर दुनिया के लिए मिसाल बन जाते हैं रोनाल्डो के फिटनेस कोच कुछ ऐसे ही बताते हैं चैंपियंस लीग का मैच खेलने के बाद जब रोनाल्डो रात के 2:00 बजे घर वापस लौटे तो उनके सारे साथी घर चले गए और वहीं बंदा सीधा ट्रेनिंग सेंटर जाकर वर्कआउट करता है मैं जीतने के बाद दुनिया के सबसे महान खिलाड़ी (great player)बनने के बाद भी यह बंदा रुकने का नाम नहीं लेता है और ऐसा ही कुछ होता है फीसंस का एट्टीट्यूड जो दूसरों से नहीं खुद के कल से कंप्लीट करते हैं खुद को और बेहतर बनाने के लिए और ऐसा नहीं है कि रोनाल्डो से बेहतर टैलेंटेड प्लेयर नहीं है पर इस बंदे के जितना कठिन परिश्रम कोई नहीं कर पाता और इस किसी कठिन परिश्रम की बदौलत कामयाबी इनके कदम चूमती है दोस्तों नंबर वन बनाना जितना मुश्किल है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है नंबर वन बने रहना और अल्टो वह सब कुछ करते हैं जो उन्हें नंबर वन बनाए रखें रोनाल्डो के एक दोस्त उनके बारे में बताते हुए कहते हैं कि ट्रेनिंग सेशन के लिए रोनाल्डो सबसे पहले फील्ड में आते थे और दिन भर के कठिन परिश्रम के बाद सबसे बाद में घर जाते थे ऐसा यह किस्सा बताते हैं कि दिन भर के प्रैक्टिस के बाद यह रोनाल्डो के घर चले गए और डिनर करने के बाद उन्हें लगा कि रोनाल्डो अब रेस्ट करेंगे पर फुटबॉल को लेकर यह बंदा वापस अभ्यास करने (practice) चला गया रोनाल्डो की पत्नी से पूछने के बाद यह पता चला कि ये अपने अभ्यास से संतुष्ट नहीं रहते (never satisfied with practice) वह हमेशा कुछ ज्यादा करना चाहते हैं और करते भी हैं तो क्या आप दे सकते हैं ऐसा अभीष्ट समर्पण(Dedication) अपने सपनों के लिए जरूर दे सकते हैं बस प्यार करो उन सपनों से और तब तक ना रुको जब तक वह अपना हकीकत (realty) में उतर जाए चाहे इसके लिए दुनिया को इधर उधर क्यों ना करना पड़ जाए तो
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