असम्भव (नामुमकिन) सोच रखने वाले (who is the reason of new thought impossible )
आप सोच सकते हैं सिर्फ उसी जानकारी के आधार पर जो आपने जमा कर रखी है। इसका मतलब है कि आप कभी भी कुछ नया नहीं सोच सकते। आप इसे Recyle कर सकते हैं आप इसे फेंक सकते हैं आप इसमें फेरबदल कर सकते हैं उलट-पुलट कर सकते हैं पर आप बिल्कुल कुछ नया नहीं सोच सकते हैं।
1. ज्यादा सोचना हानिकारक (निरर्थक) क्यों होता है--
अंग्रेजी का शब्द दिमाग कुछ खास नहीं कहता मन सिर्फ याददाश्त और बुद्धिमत्ता का मेल है। क्योंकि यह बस एक सामान्य शब्द है। जुम्मन के विभिन्न आयामों के बारे में नहीं बताता। मन मन कोई ऐसी एक चीज नहीं है जो यहां रखा हुआ है। और कुछ कर रहा है वास्तव में मन जैसी कोई चीज नहीं होती। योगिक संस्कृति में मन नहीं होता है। एक भौतिक शरीर होता है और एक मानसिक शरीर होता है क्योंकि आप अभी जिसे मन कह रहे हैं वह याददाश्त और बुद्धि का मेल है आपके शरीर में आपके कल्पना से भी ज्यादा याददाश्त है। सकते हैं उतना उससे कहीं ज्यादा आपका आपका शरीर आपके अंदर सोचने की क्षमता रखता है। निश्चित रूप से आपको याद नहीं होगा कि आपकी पर पर पर दादी कैसी दिखती थी लेकिन उनकी नाक अभी आपके चेहरे पर बैठी हुई है आपको कुछ भी याद नहीं लेकिन आपका शरीर 100% याद रखता है लाखों साल पहले आपके पूर्वज कैसे थे आपके शरीर को अभी भी याद है आपका मन इस तरह की याददाश्त के काबिल नहीं आपके शरीर के पास अरबों खरबों गुना ज्यादा याददाश्त है। हम दिन भर में 500 शब्द जैसे कि नए सीखते हैं लेकिन हमारा जो शरीर है वह इससे भी कहीं ज्यादा सोचने की क्षमता रखता है जितना हम कभी सोचने की कल्पना नहीं कर सकते उससे कहीं ज्यादा हमारा जो शरीर है वह सोचने की क्षमता रखता है। आपके दिमाग की तुलना में दिमाग और बौद्धिक प्रक्रिया की तरफ यह रुझान यह एक यूरोपियन बीमारी है या यूं कहें कि यह एक यूरोपियन कारण की वजह से है तो उन्होंने अपने विचारों को बहुत ज्यादा अहमियत दी वैसे इसलिए हुआ क्योंकि वह एक दमन किए गए समाज में रह रहे धार्मिक रूप से दबाया गया समाज जहां अगर आप में किताबों में जो लिखा है उसके अलावा कुछ सोचा जाता है तो आप को मार डाला जाता है आप को सजा दी जाएगी इसीलिए वहां के लोगों ने कुछ अलग सोचना तो दूर सोचने की हिम्मत ही नहीं की। इसीलिए वहां की किताबों में जो लिखा है उसके अलावा कुछ सोचा जाता था तो उन्हें मार डाला जाता था वह लंबे अरसे तक इस तरह रहे की इसलिए जब उन्होंने सोचने की थोड़ी आजादी मिली और वह जिंदा रह पाए तो वह अपने विचारों को बहुत ज्यादा गरिमा देने लगे।
2. विचारों के संदर्भ में समझना---
आप सोच सकते हैं कि सिर्फ उसी जानकारी के आधार पर जो आपने पहले से जमा कर रखी है नहीं कि जो आपके पास पहले से थी इसका मतलब है कि आप कभी भी कुछ नया नहीं सोच सकते आप सोचने की कोशिश ही नहीं करते आप इसे Recucle कर सकते हैं। ऑफिस में उलट-पुलट और फेरबदल कर सकते हैं पर आप बिल्कुल नया कुछ भी नहीं सीख सकते एनी की सोच ही नहीं सकते तो सीखेंगे क्या तो चलिए दोस्तों कुछ नया बाहर निकल निकालना विचार की प्रकृति में ही नहीं है या सिर्फ अतीत को Recucle करता है इसका मतलब है कि अगर आप खुद को अपनी विचार प्रक्रिया के हवाले कर देते हैं अगर आप इसे बहुत महत्व देते हैं तो आप या पक्का कर रहे हैं कि आपके जीवन में कुछ नया कभी भी नहीं होगा तो विचार को इतना महत्व देना जरूरत नहीं है जीवन प्रक्रिया की तुलना में विचार प्रक्रिया होना एक छोटी बात है । इस संस्कृति में विचार को कभी इतना महत्त्व नहीं दिया गया वह बस आपका मनोवैज्ञानिक ड्रामा है हम इसे ज्यादा अहमियत नहीं देते क्योंकि यह आपका नाटक है आप का नाटक आपके लिए महत्वपूर्ण है या किसी दूसरे का नाटक आपके लिए महत्वपूर्ण है हर कोई सोचता है कि ब्रह्मांड में उनका नाटक ही ही सबसे महत्वपूर्ण है या हर किसी का अनुभव है क्योंकि खुद के मनोवैज्ञानिक नाटक के साथ उन्होंने गहरी पहचान बना रखी है इस मनोवैज्ञानिक नाटक को आपके जीवन की प्रकृति को तय नहीं करना चाहिए क्योंकि वह बहुत छोटी घटना है जीवन प्रक्रिया की तुलना में जीवन एक कहीं ज्यादा एक गहरी समझ है बुद्धि की तुलना में
3. सोने के नकारात्मक सोच पर काबू करना---
अगर आप बहुत ज्यादा नकारात्मक सोच अपने मन के अंदर रखते हैं तो आप कभी भी आप सकारात्मक सोच सोच ही नहीं सकते आपके दिमाग में वह शब्द वह सोच जो सकारात्मक ऊर्जा को देती है जो हमारे मन को बढ़ाती वह कभी आएगी ही नहीं दोस्तों सबसे पहले हमें अपने मन के अंदर से नकारात्मक सोच को मिटाना होगा एक नई सोच को उत्पन्न करना होगा जो कि एक सकारात्मक सोच है अगर दोस्तों हमने सकारात्मक सोच को रखा तो हम अपने हर लक्ष्य को पाने में सफल होंगे जब भी सोचे सकारात्मक सोच रखें जैसे कि आपको लगता है कि मैं यह काम नहीं कर पाऊंगा मैं यह चीज नहीं कर पाऊंगा तो आप कभी भी उस कार्य को नहीं कर पाएंगे लेकिन यदि आपके मन के कोने में कहीं भी एक विश्वास जिंदा है कि मैं इस कार्य को कर लूंगा ऐसे करके दिखाऊंगा मैं यह कर सकता हूं तो आप उसे कर लेंगे इसके लिए आपके चाहे जीवन में कितनी भी रुकावट है कितनी भी बाधाएं क्यों ना है आप उसमें सफल जरूर होंगे तो दोस्तों आप अपने मन के अंदर पॉजिटिव सोच ही रखें तो आप अपने जीवन के हर एक मोड़ पर हर एक लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे चाहे कितनी भी बाधाएं क्यों ना आए।
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